कर्नाटक

हनूर गोलीकांड में नया मोड़, हथियार और मांस के साथ मिली नई चप्पलों पर उठे सवाल

Kavita2
18 Aug 2026 12:16 PM IST
हनूर गोलीकांड में नया मोड़, हथियार और मांस के साथ मिली नई चप्पलों पर उठे सवाल
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बेंगलुरु। कर्नाटक के चामराजनगर जिले के हनूर तालुक के शाग्या गांव के पास जंगल में हुई गोलीबारी की घटना अब नए विवाद में बदल गई है। इस घटना में तीन लोगों की मौत के बाद मामले की जांच जारी है, लेकिन घटनास्थल से बरामद कुछ सामानों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर वहां मिले एक जोड़ी नई चप्पलों को लेकर मृतकों के परिवार और ग्रामीणों ने संदेह जताया है।

घटना के बाद वन विभाग ने दावा किया था कि कार्रवाई के दौरान कथित शिकारियों के पास से हथियार और शिकार से जुड़े सामान बरामद किए गए थे। अधिकारियों के अनुसार, मौके से दो देसी बंदूकें, टॉर्च, गोलियां, शिकार में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और करीब 20 से 30 किलोग्राम संदिग्ध जंगली जानवरों का मांस बरामद किया गया था।

हालांकि, घटनास्थल पर मिली पैरागन कंपनी की चप्पलों की एक नई जोड़ी अब जांच का अहम हिस्सा बन गई है। मृतकों के परिवार और स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अगर तीनों लोग शिकार करने के लिए जंगल गए थे, तो उनके पास इतनी नई चप्पलें कैसे मिलीं। उन्होंने सवाल उठाया है कि जंगल जैसे कठिन इलाके में जाने के बावजूद चप्पलों की हालत इतनी बेहतर कैसे हो सकती है।

बताया जा रहा है कि घटनास्थल से मिली चप्पलों पर लगे स्टिकर भी हटाए नहीं गए थे। सामने आई तस्वीरों में चप्पलों पर कंपनी के स्टिकर दिखाई दे रहे हैं। तस्वीर के टाइमस्टैंप के अनुसार, इसे 15 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर लिया गया था। इस वजह से यह सामान जांच के दौरान चर्चा का विषय बन गया है।

मृतकों के परिवारों का कहना है कि इस मामले में कई ऐसे पहलू हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। उनका आरोप है कि केवल बरामद सामान के आधार पर पूरी घटना की कहानी तय नहीं की जा सकती। परिवार चाहता है कि गोलीबारी की परिस्थितियों, घटनास्थल पर मौजूद सभी वस्तुओं और वन विभाग की कार्रवाई की पूरी जांच हो।

वहीं, वन विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई कथित शिकारियों के खिलाफ की गई थी। विभाग के अनुसार, टीम को जंगल क्षेत्र में अवैध शिकार की सूचना मिली थी, जिसके बाद अभियान चलाया गया। कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर हथियार और जंगली जानवरों का मांस बरामद हुआ।

घटना में तीन लोगों की मौत के बाद इस मामले ने राजनीतिक और सामाजिक रूप से भी चर्चा बढ़ा दी है। स्थानीय लोग घटना की पूरी सच्चाई सामने लाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि किसी भी कार्रवाई में पारदर्शिता जरूरी है, ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके।

जांच एजेंसियां अब घटनास्थल से मिले सभी सबूतों का विश्लेषण कर रही हैं। हथियार, मांस, चप्पल और अन्य सामानों की जांच के जरिए घटना की वास्तविक स्थिति का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी आपराधिक मामले में घटनास्थल से मिले छोटे से छोटे सबूत की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि घटनास्थल पर मिली चप्पलों की वास्तविक स्थिति क्या थी और वे किसकी थीं। क्या वे मृतकों की थीं या किसी अन्य कारण से वहां मौजूद थीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

पुलिस और वन विभाग दोनों की जांच अब इस दिशा में आगे बढ़ रही है कि गोलीबारी किन परिस्थितियों में हुई और मृतक वास्तव में किस गतिविधि में शामिल थे। वहीं, परिवार और ग्रामीणों की ओर से उठाए गए सवालों के बाद मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है।

फिलहाल हनूर गोलीकांड की जांच जारी है। घटनास्थल से मिले नए सबूतों ने मामले को और पेचीदा बना दिया है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और अधिकारियों के निष्कर्षों से ही यह साफ हो सकेगा कि इस घटना की वास्तविक वजह क्या थी और घटनास्थल पर मिली चप्पलों सहित अन्य सामानों की भूमिका क्या है।

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